" भवानी दयानी महा वाकवाणी, सुर-नर-मुनि जनमानी सकल बुध ज्ञानी
जग जननी जग दानी महिषासुर मर्दिनी, ज्वालामुखी चण्डी अमर पददानी"
 

 

                    ज्योतिष विद्यापीठ की स्थापना, श्रीमान अनुराग कौशिक द्वारा सन 2007 में अंबाला छावनी में की गयी । ज्योतिष विद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ज्योतिष ज्ञान को आमजन तक पहुंचाने के अतिरिक्त, ज्योतिष की साफ सुथरी छवि को स्थापित करना था । कुछ लोगों के मन में ज्योतिष को ले कर मात्र वहम, अंधविश्वास या चमत्कार जैसी भावना ही पनपती देखी गयी है, इसी वहम, अंधविश्वास या चमत्कार की भावना को समाप्त करके ज्योतिष को प्राचीन स्तर पर पुनः स्थापति करने के उद्देश्य से ज्योतिष विद्यापीठ की स्थापना की गयी ।

 

                     ज्योतिष विद्यापीठ 2007 से हजारों की संख्या में स्त्री पुरुषों को ज्योतिष विद्या प्रदान कर चुका है और अभी भी ज्योतिष, वास्तु या यंत्र विद्या पर निरंतर कक्षाएं लगाई जा रही हैं ।

 

                     स्थान दूरी वाले विद्यार्थियों के लिए रेगुलर कक्षा में आना संभव न हो पाने पर विडियो द्वारा ज्योतिष सिखाने का प्रबंध भी किया जा चुका हैं । विद्यार्थी, नौकरीपेशा, व्यापारी, सेवानिवृत, ग्रहणियां इत्यादि सभी लोग समान रूप से ज्योतिष कक्षाओं में रुचि लेते हैं । कुछ लोग शौकिया ज्योतिष सीखते हैं, तो कुछ ज्योतिष को व्यवसाय बनाने के लिए सीखते हैं, तो कुछ लोग समाज सेवा के लिए ज्योतिष सीखते हैं । विद्यालय से ज्योतिष सीख कर विद्यार्थी अलग अलग शहरों में ज्योतिष का प्रयोग अपने अपने उद्देश्यपूर्ति हेतु कर रहे हैं । 

 


                     इसके अतिरिक्त विद्यालय के एक कार्यालय में कुंडली विश्लेषण भी किया जाता है । यह विश्लेषण विद्यालय के मुख्य ज्योतिष अध्यापक अनुराग कौशिक जी द्वारा ही किया जाता है । उन्हे कम से कम 50,000 कुंडलियाँ देखने का अनुभव प्राप्त है । उनसे समय ले कर ही मिलना होता है । 

 


                     कार्यालय से ही वास्तु सलाह भी प्रदान की जाती है । लोग समय ले कर मिलते हैं और अपने नक्शे अनुराग कौशिक जी को दिखाते हैं । आवशयकता होने पर अनुराग जी स्थल पर भी जाते हैं ।   

 

 

     

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